जयपुर: एक परिचित शहर

जब कभी आप एक नई जगह जाते हैं तो दिमाग में कई सोच आती हैं। एक सोच यह है कि इस जगह में घर की तुलना में सब अलग लगता है। मिसाल के तौर पर अगर आप एक दूसरे देश की यात्रा करें जैसे हिंदुस्तान की तो सब से पहले भारत की भिन्न संस्कृति से आप प्रभावित होंगे। परंतु कभी कभी आप पर यह प्रभाव भी पड़ेगा कि जिन लोगों, दुकानों, प्रकृति के पहलुओं की दृष्टी आती है ये सब आप को एक दूसरी जगह की याद भी दिलाएँगे। एक तरह से हिंदुस्तान परिचित लगने लगता है।

जयपुर में मुझे ये ख्याल आये।

मेरी हिंदी प्रोग्राम शुरू होने से पहले मैंने जयपुर में दो या तीन दिन ही बिताए थे। इस बार लगभग चार महिने बीत गए हैं। जयपुर में आकर शहर भर में रास्तों पर भटकते भटकते पता चल गया कि असल में राजस्थान और ओक्लाहोमा के बीच फर्क इतने ही नहीं हैं।

ओक्लाहोमा वही राज्य है जिस में मेरा जन्म हुआ और मैं बचपन से कशोरास्था के पागलपन तक बढ़ा हुआ। ओक्लाहोमा के इतिहास में पारंपरिक तौर से गोपाल मैदानों के पार गायों को झुंड में चलाते थे। जो राज्य ओक्लाहोमा घेरे हुए हैं जैसे टेक्सास, एरिज़ोना, और कॉलोरादो उन का भूगोल राजस्थान की भांति है। ओक्लाहोमा में बारिश केवल कभी कबार होती है। जब मैं छोटा था मेरी माँ मुझे डांटती करती थी जब कभी मैं बिना सोचे पानी बिगाड़ता था। मौसम सूखा है और गर्मी का तापमान सख़्त तेज़ रहता है। पर्यावरण के सादृश्य के अतिरिक्त दक्षिण-पश्चिम अम्रीका के कस्बों और शहरों का आकार जयपुर और उस के पड़ोसी गॉवों का आकार भी है।

इसलिये जब में जयपुर की हालत के बारे में सोचता हूँ मुझे पुराने पस्चिम अम्रीका के कस्बों की कलपनाएँ आती हैं। उन में डाकू पासवाले पहाड़ों से निकलते हैं और घोड़ों पर कसबे के अंडर आकर अपने बंदूकों से तामाशा करते हैं।

राजा पार्क में घुमते समय एसी निगाहें उठती हैं। कुछ सड़कें धरती और पथरों से बनी हुई हैं। लोगों को बाहर प्लास्तिक कुर्सियों पर गपशप करने की आदत है या दुकानों के प्रवेश द्वार और खिड़कियों से आप को तांकते की। हवा सूखी होती है और धूप इतनी तेज़ पड़ती है कि आप को अपना हाथ अपने आँखों के ऊपर माथे पर रखने हैं।

एक बार मैं एक होटल बार में घुसा जहाँ अंधेरा फ़ैला हुआ था। इस कमरे में चमकदार टी वी पर किसी फिल्म का आईटम सॉंग दिखा जा रहा था। पुराने पश्चिम अम्रीका में “सलून” के मंचों पर छोटे कपड़े पहनी लड़कियाँ शराब पीते आदमियों के सामने नाचती थी। आजकल इस तरह के लड़कियाँ और गूंडे बॉलीवूड फिल्मों में भी दिखते हैं।

जब मैंने मेज़ के सामने बैठकर खाना और ड्रींक ऑर्दर किया और टी वी पर रामलीला के विज्ञापन पर नज़र उठाया तो अचानक लगने लगा मानो मैं न जयपुर में था न ओक्लाहोमा में। मैंने खुद को एक तीसरी जगह में ढूढ़ लिया जो केवल बनती है जब एक पल में स्मृति, संस्कृति, और सिनेमा जैसे सपने एक दूसरे से टकराते हैं।

मेरे मन में यह अजीब-सा अनुभव यह सवाल उठाता है जो मैं फिर भी सुलझाने की कोशिश कर रहा हूँ। दोस्तो अगर जयपुर नहीं है या ओक्लाहोमा सिटी नहीं है तो यह परिचित शहर क्या है?

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